जैसा की आप सभी जानते है कार्तिकेय और गणेश को जो की भगवान शंकर के पुत्र कहलाये जाते है लकिन धर्म ग्रंथो में शिव जी के एक और पुत्र की बात कहि गयी है जो कोई देवता नही बल्कि राक्षक के रूप में जाना गया था ।
विविध ग्रंथो में अलग अलग मान्यताओ के साथ गणेश जी और कार्तिकेय के अलावा भगवान शिव और पार्वती के एक अंधक नाम का भी पुत्र था जो की माता पार्वती और शिवजी के पसीने से पैदा हुआ था । 

इस कहानी के अनुसार एक बार माता पार्वती और शिवजी भ्रमण करने के लिए कशी जैसे अति रमणीय स्थान पर जाते है वहाँ शिव जी अचानक ही सूरज की और मुख करके बैठ जाते है तभी पार्वती क्रीड़ा करने के मन से पीछे से आके भगवान शिव की आँखे बंद कर देती है इस वजह से पूरे संसार  में अंधकार का वास हो जाता है तब भोले शंकर अपनी तीसरी आंख खोल कर इस संसार में रौशनी फैलाते है लेकिन उस गर्मी की वजह से माता पार्वती की पसीने की बून्द निचे जमीन पर गिरती है और एक बालक का जन्म होता है वह बालक अंधकार में जन्म लेने के कारण उसका नाम अंधक होता है और उसी समय शिवजी की पूजा कर रहे दैत्य हिरण्याक्ष को वह पुत्र आशीर्वाद में शिव जी से प्राप्त होता है । 

असुरो के साथ और भगवान शिव का अंश होने के कारण अंधक तीनो लोको पर राज करता है और ब्रह्मा जी से मिले वरदान के साथ उसे सिर्फ तभी मार जा सकता है जब वो यौन लालसा से अपनी माँ की और देखे।
तीनो लोको में राज के साथ अब वो इन तीनो लोको की सबसे सूंदर स्त्री के साथ शादी करना चाहता है और पार्वती से ज्यादा सूंदर तीनो लोको में कोई नही है उसे पता चलता है तो अंधक पार्वती को शादी करने के लिए बाध्य करता है माता पार्वती इसके लिए मना कर देती है और शिव जी का आवाहन करती है।
शिवजी अंधक को बताते है की वही उनकी माता है और अंधक का वध कर देते है जबकि एक अन्य मतानुसार अंधक, कश्यप ऋषि और दिति का पुत्र था जिसका वध भगवान शिव ने किया था।