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सूर्यपुत्र शनिदेव, इनकी बात जब भी आती है इनका कड़क स्वभाव से एक डर सा लगने लगता है। ऐसा लगता है की जो भगवान अपने पिता तक को नहीं छोड़ सकता है वो इंसानों को कैसे छोड़ेगा। इस बात से तो आप भी परचित होंगे की शनिदेव ने सूर्यदेव पर भी ग्रहण लगा दिया था। शनि देव को कर्मफलदाता कहा जाता है, कहा यह भी जाता है की यदि शनि चाहे तो किसी की भी दशा और दिशा बदल सकते हैं। शनिदेव चाहे तो किसी को भी दुनिया से भी मिटा सकते है और वो चाहे तो इस दुनिया में उसे सबसे बड़ा बना सकते हैं।shani2

शनि का श्यामवर्ण – आखिर शनि काले क्यों हैं? कुछ लोगों के मन में यह सवाल अवश्य आता होगा। पर बहुत कम लोगों को इसका पता होगा। कहा जाता है की सूर्य के तेज को देख पाना किसी के वश की बात नहीं है। चाहे वो कोई देवलोक की कन्या ही क्यों ना हो, सूर्यदेव की पत्नी संज्ञा भी सूर्यदेव के तेज को सहन नहीं कर सकती थी। और संज्ञा ने अपने आप को सूर्यदेव के तेज से बचाने के लिए अपना छाया रूप अर्थात अपनी छाया को सूर्य की सेवा में लगा दिया और वो वहां से बहुत दूर चली गई। जब सूर्यदेव और छाया का मिलन हुआ तब छाया के गर्भ में शनिदेव आये और जैसा की आप जानते हो छाया का प्रतिरूप काला होता है तो शनिदेव का रंग भी काला है। इसलिए उन्हें श्यामवर्ण के नाम से भी जाना जाता है।