रामायण में आपने पढ़ा होगा की लक्ष्मण शूर्पनखा का नाक काट दिया था। शायद आपको उस जगह के बारें में अभी भी पता नहीं होगा की वो जगह कहां है। आज हम आपको उसी जगह के बारें में बताने वाले हैं। इतना ही नहीं राम ने जिन मंदिरों में पूजा की थी या वनवास के वक्त जहाँ जहाँ अपना डेरा बसाया था उन सभी जगहों के बारें में बताऊंगा। राम ने रावण को मारने के लिए अनेक तरह की लीलाएं रची इसके लिए शूर्पनखा का नाक काटना भी एक लीला थी। आज हम उन्ही जगहों के बारें में बताने वाले हैं। जहाँ से सीता जी का हरण हुआ था।

पंचवटी – यह महाराष्ट्र के नासिक के पास है। यहाँ गोदावरी नदी है, इसी के पास पांच बरगद के पेड़ है। इसलिए इस जगह का नाम पंचवटी रखा गया है। यहाँ हिन्दुओ के लिए दर्शन करने की आस्था सबसे ज्यादा है। यहाँ पर राम और लक्ष्मण और सीता जी का मंदिर है। यहाँ गोदवारी में जो नहाता है कहा जाता है की उसके सभी पाप धुल जाते है।

कुटिया बनाकर रहते थे राम और सीता – यह वो कुटिया है जहाँ राम और लक्ष्मण रहा करते थे। यह वाही जगह है जहाँ से सीता जी को रावण ने हरण किया था। यह कुटिया आज भी यहाँ बनी हुई है। इस कुटिया में अब राम लक्ष्मण और सीता जी की मूर्तियाँ बनी हुई है।

यहाँ काटा था लक्ष्मण ने शूर्पनखा का नाक – यह वो जगह है जहाँ लक्षमण ने शूर्पनखा का नाक काटा था। इसलिए इस जगह का नाम नासिका का रखा गया जो बदलकर नासिक बन गया। यहाँ राम जी के अनेक अवशेष आज भी मिलते है।

राम कुंड – वनवास के वक्त राम जी जहाँ स्नान करते थे उसे राम कुंड कहा जाता है। यह आज भी यहाँ स्थित है। लाखों करोड़ों लोग इस कुंड के दर्शन के लिए यहाँ आते है। यहाँ मरे हुए लोगों की अस्थियाँ भी तिराई जाती है। यहाँ तक की महात्मा  गांधी की अस्थियाँ भी इसी में तैराई गई थी।